किसान विकास पत्र कैलकुलेटर

देखें कि किसान विकास पत्र आपकी रकम को कब दोगुना करता है। मैच्योरिटी अवधि महीनों में अधिसूचित होती है और तिमाही दर के साथ बदलती है।

किसान विकास पत्र में पैसा कब दोगुना होता है?

यह पूरी तरह अधिसूचित दर पर निर्भर करता है। 7.5% पर यह 115 महीने, यानी 9 साल 7 महीने लेता है। दर बढ़े तो अवधि घटती है और दर घटे तो अवधि बढ़ती है।

क्या ख़रीदने के बाद दर बदलती है?

नहीं। जिस दिन आप प्रमाणपत्र ख़रीदते हैं उसी दिन की दर और वही मैच्योरिटी अवधि आपके पूरे प्रमाणपत्र पर स्थिर हो जाती है। बाद की तिमाही बदलने से सिर्फ़ नए प्रमाणपत्र बदलते हैं।

क्या निवेश की कोई ऊपरी सीमा है?

नहीं। प्रमाणपत्र ₹100 के गुणकों में और कम से कम ₹1,000 से जारी होता है। ₹10 लाख से ऊपर की जमा पर पहचान और दस्तावेज़ के अतिरिक्त नियम लागू हो सकते हैं।

क्या पैसा समय से पहले निकाला जा सकता है?

पहले 30 महीनों तक नहीं, सिवाय धारक की मृत्यु, न्यायालय आदेश या गिरवी रखने वाले द्वारा जब्ती जैसे अपवादों के। 30 महीने बाद निकासी की जा सकती है, पर दर होल्डिंग अवधि के हिसाब से अलग हो जाती है।

क्या किसान विकास पत्र का ब्याज टैक्स-फ़्री है?

नहीं। यही इसकी कमज़ोर जगह है। ब्याज आपके स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल है और जमा पर 80C की कोई छूट नहीं मिलती। 30% स्लैब वाले के लिए 7.5% पहले टैक्स की दर, टैक्स के बाद लगभग 5.2% जैसी रह जाती है।

किसान विकास पत्र या NSC?

NSC पाँच साल चलता है, करीब की दर देता है और पुरानी व्यवस्था में 80C के लिए काम आता है। किसान विकास पत्र में टैक्स छूट नहीं है, पर ऊपरी सीमा भी नहीं है। 80C में जगह हो तो NSC, बड़ी सुरक्षित रकम पार्क करनी हो तो किसान विकास पत्र ज़्यादा ठीक बैठता है।