EPF कैलकुलेटर

रिटायरमेंट तक अपना EPF बैलेंस समझें। 12% कर्मचारी योगदान, 8.33% पेंशन हिस्सा, ₹15,000 वेतन सीमा, वेतन बढ़ोतरी और मौजूदा 8.25% दर, सब शामिल।

नियोक्ता का हिस्सा EPF में 3.67% ही क्यों नहीं बैठता?

क्योंकि पेंशन वाला हिस्सा प्रतिशत से नहीं, रुपये की सीमा से रुकता है। 8.33% रकम सिर्फ़ ₹15,000 तक जाती है, यानी अधिकतम ₹1,250 महीना। ₹50,000 वेतन पर भी पेंशन योजना ₹1,250 ही लेती है, और नियोक्ता के बाक़ी ₹4,750 EPF में जाते हैं। इसीलिए EPF वाला हिस्सा 3.67% नहीं रहता।

किस महीने की जमा पर ब्याज कब से लगता है?

जमा खाते में पहुँचने के अगले महीने की पहली तारीख़ से। इसी कारण बराबर मासिक जमा वाले साल में 66 महीना-जमा का ब्याज बनता है, 78 का नहीं। 78 मानने वाले कैलकुलेटर कॉर्पस ज़्यादा दिखाते हैं।

अभी EPF की दर क्या है?

8.25% वित्त वर्ष 2025-26 के लिए। केंद्रीय बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2 मार्च 2026 को 8.25% की सिफ़ारिश की और सरकार ने उसे अधिसूचित किया। दर हर साल घोषित होती है, इसलिए लंबी अवधि का अनुमान वादा नहीं, केवल उदाहरण है।

क्या ₹15,000 की वेतन सीमा लागू करनी चाहिए?

यह आपके नियोक्ता पर निर्भर है, और पता पे-स्लिप से चलता है। कई नियोक्ता योगदान को वैधानिक ₹15,000 सीमा तक सीमित रखते हैं, इसलिए दोनों तरफ़ से ₹1,800 महीना ही जाता है। दूसरे नियोक्ता पूरे बेसिक पर योगदान करते हैं, जिससे कॉर्पस कहीं बड़ा बनता है।

जो पैसा पेंशन योजना में गया, क्या वह मुझे वापस मिलता है?

कॉर्पस के रूप में नहीं। पेंशन योजना का पैसा 58 की उम्र से मिलने वाली पेंशन ख़रीदता है। वह पासबुक बैलेंस का हिस्सा नहीं बनता, इसलिए यह कैलकुलेटर उसे अलग दिखाता है।

क्या EPF का ब्याज टैक्सेबल है?

आपके अपने योगदान का ₹2.5 लाख सालाना से ऊपर वाला ब्याज टैक्सेबल है। उसके नीचे EPF अब भी उन गिनी-चुनी जगहों में है जहाँ पैसा बिना टैक्स के जाता है, बढ़ता है और शर्तें पूरी हों तो बिना टैक्स के निकलता है।

नौकरी बदलने पर क्या करना चाहिए?

निकालने के बजाय बैलेंस ट्रांसफ़र करें। यूनिवर्सल अकाउंट नंबर वही रहता है, कॉर्पस बढ़ता रहता है और सेवा की निरंतरता बनी रहती है, जो टैक्स और पेंशन दोनों के लिए काम की है।