प्रोफेशनल टैक्स कैलकुलेटर

कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और पाँच और राज्यों में आपकी सैलरी से कटने वाला प्रोफेशन टैक्स देखिए, ₹2,500 की संवैधानिक सीमा और हर राज्य के स्लैब के साथ।

फ़रवरी अलग क्यों होती है?

क्योंकि बारह महीने के ₹200 मिलाकर ₹2,400 बनते हैं, और जो राज्य पूरे ₹2,500 चाहते हैं वे यह फ़र्क़ एक ही महीने में पूरा कर लेते हैं। कर्नाटक और महाराष्ट्र, दोनों यह फ़रवरी में करते हैं। तेलंगाना हर महीने सीधा ₹200 लेता है और ₹2,400 पर ही रह जाता है।

कौन से राज्य यह बिलकुल नहीं लेते?

कई, जिनमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब शामिल हैं। प्रोफेशन टैक्स राज्य का शुल्क है और हर राज्य ने इसका क़ानून बनाया ही नहीं है, इसलिए जगह बदलने से यह कटौती आपकी पे-स्लिप पर आ भी सकती है और ग़ायब भी हो सकती है।

क्या यह वापस मिल सकता है?

वापस तो नहीं, पर पुरानी व्यवस्था में हों तो यह धारा 16(iii) के तहत आपकी करयोग्य सैलरी घटा देता है। नई व्यवस्था इसके लिए कोई कटौती नहीं देती, इसलिए वहाँ वे ₹2,500 बस चले जाते हैं।

मैं काम एक राज्य में करता हूँ और रहता दूसरे में, तो?

तय वह राज्य करता है जहाँ आप काम करते हैं, क्योंकि यह शुल्क आपके पते के पीछे नहीं, काम की जगह के पीछे चलता है। आपके नियोक्ता के दफ़्तर कई राज्यों में हों, तो वही राज्य जहाँ से आपकी पेरोल चलती है।

क्या महिलाएँ भी उतना ही देती हैं?

महाराष्ट्र में नहीं, जो महीने के ₹25,000 तक कमाने वाली महिलाओं को छूट देता है जबकि पुरुष ₹7,500 से ऊपर देते हैं। ज़्यादातर दूसरे राज्य कोई फ़र्क़ नहीं करते। ऊपर विकल्प बदलकर अपने राज्य का बर्ताव देख लीजिए।

ये स्लैब कितने पक्के हैं?

कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना किसी राजपत्र अधिसूचना या विभाग की अपनी प्रकाशित अनुसूची से आते हैं और हम हर एक का हवाला नीचे देते हैं। बाक़ी पाँच सिर्फ़ मार्गदर्शन के तौर पर दिए गए हैं और पन्ने पर असत्यापित लिखा है, क्योंकि हम वित्त वर्ष 2025-26 के लिए उनका कोई प्राथमिक स्रोत खोल नहीं सके। उन्हें अपनी पे-स्लिप से मिलाकर देख लीजिए।