आख़िरी बेसिक या औसत वेतन से केंद्रीय सिविल पेंशन निकालिए, फिर पेंशन आदेश की रकम और कम्यूटेशन के बाद बची पेंशन जाँचिए।
दो वेतन-रकम क्यों भरनी पड़ती हैं?
क्योंकि नियम दोनों में से जो ज़्यादा फ़ायदेमंद हो उसे चुनता है, और आदेश दोनों तरफ़ से ग़लत हो सकता है। विभाग दस महीने का औसत पढ़ सकता है जबकि आख़िरी बेसिक ज़्यादा था, या उलटा। यह पेज दोनों की क़ीमत लगाकर बताता है कि पेंशन वाली पंक्ति से कौन-सा मेल खाता है।
घटी हुई पेंशन छोटी क्यों है लेकिन महँगाई राहत वही क्यों रहती है?
क्योंकि आधिकारिक पेंशन पोर्टल कहता है कि मासिक पेंशन कम्यूट किए गए हिस्से से घटती है, लेकिन महँगाई राहत मूल पेंशन पर ही चलती रहती है। कम्यूटेशन पेंशन वाली पंक्ति को काटता है, महँगाई राहत के आधार को नहीं।
अगर पेंशन आदेश मूल पेंशन के बजाय घटी हुई पेंशन से मेल खाता हो तो?
तब आप शायद कम्यूटेशन के बाद वाली पेंशन देख रहे हैं, मूल पेंशन नहीं। यह एक अच्छी वजह है, ग़लती नहीं। बहुत से पेंशन काग़ज़ दोनों रकम पास-पास रखते हैं, और पाठक पहले वही छोटी रकम उठा लेते हैं जो बैंक में आती है।
यह पेज कम्यूटेशन की एकमुश्त रकम क्यों नहीं निकालता?
क्योंकि उस नक़द रकम के लिए उम्र-आधारित कम्यूटेशन फैक्टर तालिका चाहिए। आधिकारिक पोर्टल उस तालिका का नाम लेकर लिंक देता है, लेकिन यह पेज उम्र वाले फैक्टर उद्धृत नहीं करता, इसलिए एकमुश्त रकम निकालने का दिखावा भी नहीं करता। यह उसी मासिक पेंशन पंक्ति पर रहता है जो आदेश पहले से छापता है।
क्या यह पेज हर सरकारी पेंशन जाँच सकता है?
नहीं। यह सिर्फ़ उसी केंद्रीय सिविल रास्ते के लिए है जिसे आधिकारिक पेंशन पोर्टल समझाता है। EPS, रक्षा पेंशन, राज्य पेंशन और एन्युटी उत्पाद अलग व्यवस्थाएं हैं, और यहाँ पूरा मकसद उन्हें एक झूठे परिवार में न मिलाना है।