जानें कि नौकरी छोड़ने पर आपकी ग्रेच्युटी कितनी बनती है। ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम का 15 / 26 वाला नियम, अधूरे साल की गिनती, और ₹20 लाख की सीमा - सब शामिल।
26 से भाग क्यों, 30 से क्यों नहीं?
अधिनियम महीने को 26 कार्यदिवस मानता है, इस तर्क पर कि चार रविवार छुट्टी के दिन हैं। 30 के बजाय 26 से भाग देने पर एक दिन का वेतन बड़ा बैठता है, इसलिए यह नियम आपके ही हक़ में है।
क्या पाँच साल की नौकरी ज़रूरी है?
आम तौर पर हाँ। अधिनियम पाँच साल की लगातार सेवा माँगता है। मृत्यु और दिव्यांगता अपवाद हैं, जिनमें सेवा की अवधि चाहे जितनी हो, परिवार या कर्मचारी को ग्रेच्युटी मिलती है। कुछ अदालती फ़ैसलों ने 4 साल 240 दिन को पाँच साल माना है, इसलिए आप इस सीमा के पास हों तो पूछ लें।
यहाँ वेतन में क्या-क्या गिना जाता है?
आख़िरी बार मिला बेसिक वेतन और महँगाई भत्ता। HRA, बोनस, ओवरटाइम और दूसरे भत्ते बाहर रहते हैं। इसीलिए ग्रेच्युटी अक्सर CTC देखकर लगाए अंदाज़े से कम बैठती है।
क्या 6 महीने और 1 दिन से साल पूरा गिना जाएगा?
हाँ। अधिनियम कहता है कि "छह महीने से अधिक" का हिस्सा पूरा साल गिना जाएगा। ठीक छह महीने पूरा साल नहीं बनते। एक दिन ज़्यादा बनता है, और वह पंद्रह दिन के वेतन के बराबर हो सकता है।
क्या मेरी ग्रेच्युटी टैक्स-फ़्री है?
एक हद तक। आयकर अधिनियम की धारा 10(10) तीन में से सबसे कम रकम पर छूट देती है: ₹20,00,000, अधिनियम के हिसाब से देय रकम, और जो आपको असल में मिला। इसलिए आम तौर पर पूरी रकम छूट में आ जाती है, और टैक्स तभी बनता है जब नियोक्ता अधिनियम से ज़्यादा दे। यह छूट अधिनियम की सीमा से अलग नियम है और इसकी अपनी अधिसूचना है।
अगर मेरा नियोक्ता अधिनियम के दायरे में न हो तो?
तब 15 / 26 वाला फ़ॉर्मूला उन पर बाध्य नहीं है। अधिनियम से बाहर के छोटे संस्थान अपनी नीति के हिसाब से देते हैं, जो अक्सर कम उदार होती है। अपना नियुक्ति पत्र या कर्मचारी नियमावली पढ़ लें।