दोनों रास्ते एक ही शुरुआती रकम से चलाइए और देखिए कि आपके ठहरने की अवधि में कौन सा आपको ज़्यादा अमीर छोड़ता है, और ख़रीदना किस साल आगे निकलता है।
इस हिसाब में किराया इतनी बार क्यों जीत जाता है?
क्योंकि डाउन पेमेंट और ख़रीद के ख़र्च बड़ी रकमें होती हैं जो वरना निवेशित रहतीं, और क्योंकि शुरुआती सालों की EMI में इक्विटी कम और ब्याज ज़्यादा होता है। ख़रीदना तब जीतता है जब क़ीमत के मुक़ाबले किराया ऊँचा हो, जब फ्लैट आपके निवेश से तेज़ महँगा हो, या जब आप इतने लंबे समय रहें कि लोन उतर जाए।
सबसे ज़्यादा मायने कौन सा आँकड़ा रखता है?
यह कि आप कितने समय रहेंगे। ख़रीदने में दोनों सिरों पर बड़े एकमुश्त ख़र्च लगते हैं, और वे समय के साथ ही बँटते हैं। करीब पाँच साल से कम में वे ख़र्च शायद ही वसूल होते हैं। बाक़ी सब बराबर हो तो लंबा ठहरना ख़रीदने के पक्ष में जाता है।
क्या इसमें होम लोन पर मिलने वाली टैक्स छूट गिनी गई है?
नहीं, और यह मायने रखता है। ब्याज पर धारा 24(b) की राहत, और किराये पर रहने पर HRA की छूट, दोनों हर महीने की असली लागत बदल देती हैं। यहाँ इनमें से कोई नहीं गिना गया, इसलिए इसे टैक्स से पहले की तुलना मानिए और अपनी स्थिति के लिए इनकम टैक्स तथा HRA वाले पन्ने देख लीजिए।
मैं बेचूँगा ही नहीं, फिर बेचने का ख़र्च क्यों लगाया जाता है?
ताकि तुलना बराबरी की हो। किराये वाला रास्ता आख़िर में एक पोर्टफ़ोलियो छोड़ता है जिसे नक़द में बदला जा सकता है। ख़रीदने वाले रास्ते को ऐसे घर का पूरा बाज़ार मूल्य दे दिया जाए जिसे बेचने में 2% लगता, तो उसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है। आपको पक्का पता है कि आप कभी नहीं बेचेंगे, तो बेचने का ख़र्च शून्य कर दीजिए और फ़र्क़ देख लीजिए।
मैं वह बचा हुआ पैसा सचमुच निवेश ही न करूँ तो?
तो किराया वैसा नहीं चलेगा जैसा यह पन्ना दिखाता है। यह हिसाब ऐसा किरायेदार मानकर चलता है जो अनुशासन से डाउन पेमेंट और हर महीने की बचत निवेश करता है। किराये के पक्ष की पूरी दलील उसी मान्यता पर टिकी है। ख़रीदने के पक्ष में जबरन बचत वाली दलील असली दलील है, और वह गणित की नहीं, आदत की बात है।
क्या 6% की बढ़त मान लेना ठीक है?
वह एक जगह भरने वाला आँकड़ा है, कोई भविष्यवाणी नहीं। भारत में रिहायशी क़ीमतें लंबे समय तक एक जगह पड़ी भी रही हैं और तेज़ी से भागी भी हैं, और वे शहर तथा इलाक़े के हिसाब से बहुत अलग होती हैं। अपने इलाक़े के लिए वह आँकड़ा भरिए जिसका आप बचाव कर सकें, और एक निराशावादी आँकड़ा भी आज़मा लीजिए।