नो कॉस्ट EMI कैलकुलेटर

नो कॉस्ट EMI ऑफ़र की असली लागत निकालिए, ब्याज पर लगने वाले GST और प्रोसेसिंग फ़ीस समेत, और वह असरदार सालाना दर भी जिससे दो ऑफ़र मिलाकर देखे जा सकें।

क्या नो कॉस्ट EMI सचमुच मुफ़्त होती है?

लगभग कभी नहीं। ब्याज सचमुच दुकानदार काट देता है, इसलिए दावे का वह हिस्सा सही है। जो बचा रह जाता है वह है बैंक के लिए गए ब्याज पर GST, क्योंकि टैक्स छूट लगने से पहले निकाला जाता है, और कोई प्रोसेसिंग फ़ीस अपने GST के साथ। छोटी ख़रीद पर यह कुछ सौ रुपये हो सकता है; बड़ी पर कई हज़ार।

ब्याज पर छूट मिल गई तो GST क्यों लगता है?

क्योंकि ये दो अलग लेन-देन हैं। बैंक ने पैसा उधार दिया है और उस पर ब्याज लिया है, और वह उस सेवा पर GST लगाता है। दुकानदार फिर अपने मुनाफ़े में से आपको छूट देता है। वह छूट आपका दुकानदार वाला बिल घटाती है, बैंक ने जो लिया वह नहीं, इसलिए बैंक के शुल्क पर लगा टैक्स बना रहता है।

नो कॉस्ट EMI लूँ या पूरा पैसा एक बार में दे दूँ?

हमेशा कोई एक नहीं - सब असरदार सालाना दर पर टिका है। इस पन्ने की दर को उससे मिलाइए जो वह पैसा आपके पास रहने पर कमाता। छोटी अवधि की नो कॉस्ट EMI असरदार 4% पर सस्ता उधार है। वह तब सस्ती नहीं रहती जब दुकानदार पूरा पैसा देने पर नक़द छूट देता हो और EMI चुनकर आप वह छोड़ रहे हों, क्योंकि वह छूट इस ऑफ़र की असली लागत है।

नो कॉस्ट ऑफ़र में लंबी अवधि ज़्यादा महँगी क्यों पड़ती है?

ज़्यादा महीनों पर बैंक ज़्यादा ब्याज लेता है, और GST ब्याज के पीछे-पीछे चलता है। दुकानदार ब्याज देता है, टैक्स नहीं, इसलिए उसी ख़रीद पर 24 महीने की नो कॉस्ट EMI, 3 महीने वाली से कहीं ज़्यादा GST ढोती है।

EMI चुनने से जो नक़द छूट छूटती है, क्या वह इसमें है?

नहीं। यह पन्ना ख़ुद EMI ऑफ़र की क़ीमत लगाता है। वही दुकान पूरा पैसा देने पर ₹2,000 कम लेती हो, तो वे ₹2,000 किस्तें चुनने की एक और लागत हैं, और मिलाकर देखने से पहले उन्हें जोड़ लीजिए।

18% कहाँ से आता है?

यह वित्तीय सेवाओं पर लगने वाली सामान्य GST दर है, जो हमारे तारीख़वार GST नियम-संग्रह में अपने स्रोत के साथ रखी है। यह इस पन्ने पर कोई तय आँकड़ा नहीं, एक इनपुट है, इसलिए आपके स्टेटमेंट में जो दिख रहा हो वही भरकर असर देख सकते हैं।