देखें कि आपके नियोक्ता को धारा 192 के तहत हर महीने कितना TDS काटना चाहिए। सैलरी, घोषित निवेश, बीते हुए महीने और पहले से कटा TDS - सब साथ लेकर हिसाब करता है।
मेरा TDS टैक्स का सीधा बारहवाँ हिस्सा क्यों नहीं है?
क्योंकि साल चल चुका होता है। नियोक्ता साल के बचे हुए टैक्स को आने वाले महीनों में बाँटता है, इसलिए देर से शुरू हुई कटौती या देर से दिए गए निवेश प्रमाण बाक़ी महीनों की कटौती बढ़ा देते हैं।
औसत टैक्स दर क्या होती है?
कुल टैक्स को कुल आय से भाग देने पर जो दर आती है वही औसत टैक्स दर है। ₹15,00,000 की आय और ₹97,500 टैक्स पर यह 6.5% बैठती है, जबकि आख़िरी कमाया रुपया 15% स्लैब में पड़ सकता है। धारा 192 कटौती औसत दर से कराती है।
अगर नियोक्ता ने ज़्यादा TDS काट लिया तो?
वह बाक़ी महीनों में कटौती रोक सकता है और ज़्यादा कटी रकम समायोजित भी कर सकता है, क्योंकि धारा 192(3) यह अनुमति देती है। अगर साल ख़त्म हो चुका हो, तो रिफंड आयकर रिटर्न से लेना पड़ता है।
क्या नियोक्ता मेरी दूसरी आय भी जोड़ता है?
सिर्फ़ तब जब आप बताएं। ब्याज, किराया या दूसरी आय पेरोल को बताएँगे तो वह उसी बड़ी आय पर TDS काटेगा। नहीं बताएँगे तो उस हिस्से पर आपको अलग से अग्रिम कर देना पड़ सकता है।
पेरोल किस टैक्स व्यवस्था का इस्तेमाल करता है?
जब तक आप कुछ और न बताएं, आम तौर पर नई व्यवस्था का। नियोक्ता साल की शुरुआत में आपसे विकल्प लेता है और उसी आधार पर कटौती करता है। रिटर्न भरते समय आप कई मामलों में विकल्प बदल भी सकते हैं।
अगर साल के बीच नौकरी बदली तो?
नई कंपनी को 12B फ़ॉर्म दीजिए, जिसमें पुरानी नौकरी की सैलरी और TDS हो। उसके बिना नया नियोक्ता मान लेगा कि साल आपने उसी के साथ शुरू किया, और फिर मार्च में टैक्स कम कटने का झटका लग सकता है।