दो तारीख़ों के बीच दिन, हफ़्ते, महीने और साल गिनिए। शनिवार-रविवार निकालकर कामकाजी दिन अलग से देखिए, और ज़रूरत हो तो आख़िरी दिन भी गिनती में लीजिए।
क्या आख़िरी दिन भी गिनना चाहिए?
यह इस पर है कि आप गिन क्या रहे हैं। दो तारीख़ों का सादा अंतर उसे नहीं गिनता। नोटिस अवधि, होटल में ठहरना या अस्पताल में भर्ती रहना आम तौर पर गिनता है, क्योंकि आख़िरी दिन भी पूरा दिन माना जाता है। अपने हिसाब से ऊपर वाला बटन चला लीजिए।
क्या सरकारी छुट्टियाँ भी कामकाजी दिनों में से निकलती हैं?
नहीं। सिर्फ़ शनिवार और रविवार निकलते हैं। भारत में छुट्टियाँ राज्य और साल के हिसाब से बदलती हैं, और बहुत से दफ़्तर उनमें से कुछ पर काम करते हैं। अपनी सूची ख़ुद कामकाजी दिनों में से घटा लीजिए।
क्या यह लीप वर्ष संभालता है?
हाँ। गिनती असली कैलेंडर दिनों की होती है, इसलिए पूरे साल पर 2024 सही तरीक़े से 366 दिन दिखाता है और 2023, 365।
महीने और दिन सीधे भाग से मेल क्यों नहीं खाते?
क्योंकि महीने बराबर लंबाई के नहीं होते। अवधि 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक हो तो 365 दिन 12 महीने नहीं बनते, 11 महीने और 30 दिन बनते हैं। 30 से भाग देने पर अलग और ग़लत जवाब आता।
इसका इस्तेमाल कहाँ कर सकते हैं?
नोटिस अवधि, प्रोजेक्ट की आख़िरी तारीख़, वीज़ा पर ठहरना, छोटी अवधि के कर्ज़ का ब्याज, दो नौकरियों के बीच का फ़ासला, और शादी या परीक्षा में कितना बचा है। जहाँ भी अंदाज़े की जगह ठीक-ठीक दिन गिनने हों।
तारीख़ें उल्टे क्रम में भर दीं तो?
कुछ नहीं बिगड़ता। कैलकुलेटर उन्हें आपस में बदल लेता है, आपको बता देता है कि बदला है, और वही जवाब देता है। दो तारीख़ों के बीच का फ़ासला किसी दिशा में नहीं होता।